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pawan punyanand

Abstract

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pawan punyanand

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धार्मिकता

धार्मिकता

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धर्म करते हैं वो,

जो मानव के हित,

श्रष्टि प्रेम में लिप्त,

सेवा उपासना रत,

ज्ञान, विज्ञान, शान्ति,

सोहार्द, दान, सम्मान,


करते जन कल्याण के काम,

हो आसक्ति विहीन,

स्व की खोज में लीन,

राह पे चलते जो अनश्वर,

करते खोज प्रेम में भर,

चरणों में उसके अपना शीश धर।


पर ये क्या है ?

जो सिखाते नित् नई उपद्रव,

मानव को करते मानव से अलग,

नही सोचते रुक छन भर,

क्या ये हित संसार के होगा ?


दुःख कष्ट से क्या मनुज इससे पार होगा ?

नहीं ये धर्म नही अधर्म है,

जीवन दिया जिसने है,

है उसी को खत्म करने का अधिकार,

क्यों बेवजह करते है,

झूठे धर्म का व्यापार,


कोई धर्म नहीं सिखाता,

श्रष्टि में विभेद करना,

सभी हैं उसी से निर्मित,

सभी को एक दिन,

उसी में लय होना।


सभी धर्मों ने सिखाया

मूल बातें जो मनुजता की

छोड़ पाखंडो में ना फंसे

हम सभी असुरता की।


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