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pawan punyanand

Abstract

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pawan punyanand

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मैं लिखूंगा - 3

मैं लिखूंगा - 3

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सफेद स्याही नहीं होती,

होती तो शायद,


झूठ लिखी जाती

इसी से।


सच, काले रंग का

प्रतीक बन जाता।


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