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Kawaljeet GILL

Abstract Classics Inspirational

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Kawaljeet GILL

Abstract Classics Inspirational

देखा है तुझे....

देखा है तुझे....

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देखा हैं तुझे इतने करीब से फिर कैसे ना हो तुझसे मोहब्बत,
ऐ मौत तू मेरी दोस्त भी है हमसफर भी है,
जानते है हम की मेरी आखरी मंजिल भी तू है, नही लगता हमको डर तुझसे मेरी दुश्मन नही तू दोस्त है,

 बार बार तुझसे दोस्ती हो जाती है और फिर हम जुदा हो जाते है,
इक न इक दिन तो तू हमे साथ अपने ले जाएगी, गहरी नींद में मैं सो जाऊँगी और कोई आवाज़ ना फिर उठा पाएगी,
जाने क्यों लगता है कि वो वक्त अब बहुत करीब है,

 ना ही किसी से कोई गिला है ना ही कोई उम्मीद है,
हर किसी से हँस कर हमने अलविदा कह दिया, कोई ना समझ पाया कि ये अंतिम मुलाकात हो शायद हमारी,
लेकिन दिल इस बात की गवाही दे रहा है,

इक बार जो विदा हो गए इस जहां से फिर ना लौट कर आएंगे हम,
बहुत हँसी बहुत मजाक कर लिया सबसे,
मेरे मरने पर ना तुम आँसू बहाना,
हँस कर विदा करना हमको ये गुजारिश है तुमसे ।


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