हाँ नही कविता
हाँ नही कविता
हाँ मुझे तुझसे मोहब्बत है इंतेहा,
नही हम तुम शायद ही मिल पाएंगे !
हाँ प्यार मेरा तुम आखरी हो ये हकीकत है,
नही तुम मेरा पहला प्यार नही हो कोई और है !
हाँ हम तुम कभी मिले ही नही है फिर भी प्यार है,
नही हम तुम से कभी नफरत नही कर सकते !
हाँ हम तुम दो जिस्म एक जान है,
नही दिलो के बंधन कभी टूटते नही !
हाँ तुम मेरे कान्हा और मैं तेरी राधा हूँ,
नही हमारे दरमियाँ के फासले शायद कम ना हो सके !
हाँ साथ समुंद्र पार तुम रहते हो ये सच है,
नही तुम मेरे दिल मे रहते हो ये भी हकीकत ही तो है !
हाँ लोग कहते है तुम परदेशी हो कभी नही आओगे,
नही तुम से मेरा रिश्ता जन्मो का है ये दिल कहता है !
