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Kawaljeet GILL

Abstract Inspirational Others

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Kawaljeet GILL

Abstract Inspirational Others

हाँ नही कविता

हाँ नही कविता

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हाँ मुझे तुझसे मोहब्बत है इंतेहा,
नही हम तुम शायद ही मिल पाएंगे !

हाँ प्यार मेरा तुम आखरी हो ये हकीकत है,
नही तुम मेरा पहला प्यार नही हो कोई और है !

हाँ हम तुम कभी मिले ही नही है फिर भी प्यार है, नही हम तुम से कभी नफरत नही कर सकते !

हाँ हम तुम दो जिस्म एक जान है,
नही दिलो के बंधन कभी टूटते नही !

हाँ तुम मेरे कान्हा और मैं तेरी राधा हूँ,
नही हमारे दरमियाँ के फासले शायद कम ना हो सके !

हाँ साथ समुंद्र पार तुम रहते हो ये सच है,
नही तुम मेरे दिल मे रहते हो ये भी हकीकत ही तो है !

हाँ लोग कहते है तुम परदेशी हो कभी नही आओगे,
नही तुम से मेरा रिश्ता जन्मो का है ये दिल कहता है !


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