साथ रहने का वादा
साथ रहने का वादा
मुझे भूल जाना अगर मेरी याद आये,
जिंदगी के सफर में साथ यहीं तक था,
एक मुसाफ़िर हूँ आज इस गली हूँ
कल ना जाने किस मंजिल की तलाश में निकल लू ।
साथ निभाने का वादा किया था कभी हमने,
ना जाने वो वादे वो कसमे तोड़ दे हम ये दिल की आवाज़ है,
तकदीर हमको कहाँ ले जाये ये हम नही जानते,
शायद ये जिंदगी हमको दगा दे जाए,
गर साँसे साथ निभायेगी तो मिलने की कोई उम्मीद रहेगी,
वरना ना जाने कब ये वादे हमारे टूट कर बिखर जाए,
ख्वाबो में भी गर हम आ गए कभी तो,
ये ही गुजारिश है मुझे भूल जाना गर मेरी याद आये ।
