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Uma Pathak

Tragedy

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Uma Pathak

Tragedy

दौलत

दौलत

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कुछ दौलत के कारण इंसान

इंसान को भूल जाता है

यह आज तक किसकी हुई यह

बात इंसान भूल जाता है।


इसके कारण कभी बाप-बेटी का

मेल नहीं हो पाता है

मां से उसका बेटा बिछड़ जाता है

कुछ पल खुशी के खातिर वह

अपनों का कातिल बन जाता है।


कुछ दौलत के खातिर

इंसान अपनों को भूल जाता है

कुछ रुपयों की खातिर

अमीर गरीब का अंतर हो जाता है।


किसी को इतना मिलता

वह बिना बात के उड़ाता

और कोई दो वक्त की रोटी के लिए

तरस जाता है।


दौलत का यह खेल

पहले से चला आया है

इसको कमाने में अपने

अपनों को गँवाया है

हर मोड़ में इसकी कमी है

इसने इंसान को हंसाया तो

किसी को रुलाया है।


चाहे कितना भी कमा लो

इंसान जाना खाली हाथ है

जब तक यह साथ है

तब तक अपनों का हाथ है।


नहीं तो हर कोई बगावत के साथ है

दौलत जिसके पास है

वह गँवाने मैं अकेला है

जिसके पास नहीं है

वह कमाने में अकेला है।


दौलत के साथ इंसान

हर हाल में अकेला है।


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