Sandeep pandey
Tragedy
मैं ग़लत की तू ग़लत
तेरे फ़िराक़ में गुर्चा ना कर,
आजा दुबारा लौट के फ
हम सा ना
मैं ग़लत की तू ग़लत...
मेरे निगाह-ए-शौक़ में यूँ तो कई चेहरे द
निज़ाम ( सिस्...
होली (सूफ़ी ग...
जाति
ज़र्द पत्ते
क़ासिद
चर्चा ना कर ....
अब आए हो...
दो राहें
क्यूँ दिए थे ये पंख मुझे क्यूँ दी मुझे एक झूठी दिलासा। क्यूँ दिए थे ये पंख मुझे क्यूँ दी मुझे एक झूठी दिलासा।
जिनसे दोस्ती थी, वो दुश्मनों में हुए शामिल अब पराए भी देखते है जैसे, नही मैं किसी काबिल। जिनसे दोस्ती थी, वो दुश्मनों में हुए शामिल अब पराए भी देखते है जैसे, नही मैं...
हम लड़के हैं। हम सबकी सुनेंगे... लेकिन हमें कोई नहीं.... कोई नहीं सुन सकता। हम लड़के हैं। हम सबकी सुनेंगे... लेकिन हमें कोई नहीं.... कोई नहीं सुन सक...
चेहरे पर लीपापोती की खूबसूरती है, और मन की खूबसूरती से परे हैं हम। चेहरे पर लीपापोती की खूबसूरती है, और मन की खूबसूरती से परे हैं हम।
बदलते से लगते अपने गांव हैं दुकान की जगह,छोटे स्टोर हैं। बदलते से लगते अपने गांव हैं दुकान की जगह,छोटे स्टोर हैं।
मां बाप ने बिटिया की उड़ान को चुना, घूंघट ब्याह खोखली रस्मों को त्याग दिया, मां बाप ने बिटिया की उड़ान को चुना, घूंघट ब्याह खोखली रस्मों को त्याग दिया,
और मुझे नहीं सिर्फ मेरा पुतला जलाते हो आखिर किसको भरमाते हो। और मुझे नहीं सिर्फ मेरा पुतला जलाते हो आखिर किसको भरमाते हो।
अभी भी दिल के किसी कोने में कोई ख्वाहिश, कोई अरमान बाकी है या नहीं। अभी भी दिल के किसी कोने में कोई ख्वाहिश, कोई अरमान बाकी है या नहीं।
खुशियों का कब कहां ठिकाना था सब झूठ और वहम का फ़साना था। खुशियों का कब कहां ठिकाना था सब झूठ और वहम का फ़साना था।
ये दुनिया हिंसा और मोह के मुखौटे का है, मगर जीत हमेशा से सच्चाई और कर्म की होती आ रही ये दुनिया हिंसा और मोह के मुखौटे का है, मगर जीत हमेशा से सच्चाई और कर्म की हो...
नादान सा दिल ,टूट गया उसकी बातों से , भीगी पलकों पर ठहरे मोती ,खामोश रातों में। नादान सा दिल ,टूट गया उसकी बातों से , भीगी पलकों पर ठहरे मोती ,खामोश रातों में।
एक नारी जीवन के जहर का कितना घूट पीना पड़ा। एक नारी जीवन के जहर का कितना घूट पीना पड़ा।
ज़रा जानवरों से सीखिये, जो इंसानों की तरह सभी को दिखाकर नहीं रोता। ज़रा जानवरों से सीखिये, जो इंसानों की तरह सभी को दिखाकर नहीं रोता।
यह हमारा भारत वर्ष है जो उच्चतम है संस्कारों में। गुरु माता-पिता सदा रहे हैं पूजनीय। यह हमारा भारत वर्ष है जो उच्चतम है संस्कारों में। गुरु माता-पिता सदा रहे हैं ...
ओ स्त्री , तुम कभी पुरुष नहीं बन पाओगी। ओ स्त्री , तुम कभी पुरुष नहीं बन पाओगी।
हर चोटी पे फहरा के लहरा के ऊंचा अपना तिरंगा मैं भी मां का नाम ऊंचा कर के आऊंगा। हर चोटी पे फहरा के लहरा के ऊंचा अपना तिरंगा मैं भी मां का नाम ऊंचा कर के आऊं...
तब पहली बार मुझे अपने स्त्री होने पर बड़ा गुस्सा आया था.... तब पहली बार मुझे अपने स्त्री होने पर बड़ा गुस्सा आया था....
बादलों का मिजाज आजकल बदला-बदला है। बादलों का मिजाज आजकल बदला-बदला है।
यह युद्ध है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा। यह युद्ध है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा।
मैं भी भाग ना पाई इस पिंजरे से कभी, और बस ऐसे ही पंख फड़फड़ा कर रह गई, मैं भी भाग ना पाई इस पिंजरे से कभी, और बस ऐसे ही पंख फड़फड़ा कर रह गई,