Sandeep pandey
Drama
रंग दिया तूने रंग में अपने ऐस
तेरे इश्क़ का हरा मैं डूब के म
उम्मीदां तेले चेहरों वि।
'ज़ाहिद'तेरी ग
साडी होली वी मंड़ जावे त दे दिल्ल
निज़ाम ( सिस्...
होली (सूफ़ी ग...
जाति
ज़र्द पत्ते
क़ासिद
चर्चा ना कर ....
अब आए हो...
दो राहें
ये खुद से विरह की निशानी मुझे धुंधली सी दिखाई क्यों दी ? ये खुद से विरह की निशानी मुझे धुंधली सी दिखाई क्यों दी ?
वो पेरिस में लहराएगी, तिरंगा सुदूर वो पेरिस में लहराएगी, तिरंगा सुदूर
यह जीवन की सच्चाई है आज समझ मुझे आई है यह जीवन की सच्चाई है आज समझ मुझे आई है
मौसम सुहाना है, मस्त नज़ारा है, कोयल का तराना मधुर लग रहा है। मौसम सुहाना है, मस्त नज़ारा है, कोयल का तराना मधुर लग रहा है।
जान से बेपरवाह हुए बैठे हैं हम कब मशहूर करोगे लिख देना। जान से बेपरवाह हुए बैठे हैं हम कब मशहूर करोगे लिख देना।
जमाना सारा देख रहा है वफ़ा मेरी क्या रंग लायी है......! जमाना सारा देख रहा है वफ़ा मेरी क्या रंग लायी है......!
तुझ को आलिंगन दे कर "मुरली", मैं मदहोंश बन गया। तुझ को आलिंगन दे कर "मुरली", मैं मदहोंश बन गया।
"मुरली" तेरी है प्रेम दीवानी तू, आ कर मुझे दिल में समा जा। "मुरली" तेरी है प्रेम दीवानी तू, आ कर मुझे दिल में समा जा।
बनाते है दोषी वो खुद को ही अक्सर जाने कैसी मोहब्बत जताने लगे है ! बनाते है दोषी वो खुद को ही अक्सर जाने कैसी मोहब्बत जताने लगे है !
कृपा करो हे देवगुरु, काटो सारा क्लेश। राजनीति को दो दिशा, प्रगति करे यह देश।। कृपा करो हे देवगुरु, काटो सारा क्लेश। राजनीति को दो दिशा, प्रगति करे यह देश।।
कवि देवा कहें सतगुरु काहा माने संभलकर उतरे भवसागर पार। कवि देवा कहें सतगुरु काहा माने संभलकर उतरे भवसागर पार।
मुआवजा मिला क्या यूँ जाने के लिए, कि तेरे सामने किसी और के हो जाएँ। मुआवजा मिला क्या यूँ जाने के लिए, कि तेरे सामने किसी और के हो जाएँ।
कहीं बचा नही कोई स्थान, कैसे बिठाऊं किसी को मन में। कहीं बचा नही कोई स्थान, कैसे बिठाऊं किसी को मन में।
तेरे चेहरे की कल्पना कर के मैं, सितारों की महेफ़िल सजाता हूं, तेरे चेहरे की कल्पना कर के मैं, सितारों की महेफ़िल सजाता हूं,
कुछ किताबों को पढा था चंद वर्ष पहले जो मिली मोहब्बत जुबानी लिख रहा हूँ ! कुछ किताबों को पढा था चंद वर्ष पहले जो मिली मोहब्बत जुबानी लिख रहा हूँ !
छिपकर बैठ जाते हैं घर में सबलोग, जब भी आकाश में गड़गड़ाता बादल। छिपकर बैठ जाते हैं घर में सबलोग, जब भी आकाश में गड़गड़ाता बादल।
"मुरली" में मल्हार की धून सून जाना, झरमर बरस रही है बूँदें सावन की। "मुरली" में मल्हार की धून सून जाना, झरमर बरस रही है बूँदें सावन की।
उनके मुंह पर तमाचा है, जो महिलाओं को मानते कमजोर, दरख़्त उनके मुंह पर तमाचा है, जो महिलाओं को मानते कमजोर, दरख़्त
कठिनाइयों के शूल पर मजबूती से रख, पग तेरा दृढ़ निश्चय शूलों को फूलों में देगा, बदल। कठिनाइयों के शूल पर मजबूती से रख, पग तेरा दृढ़ निश्चय शूलों को फूलों में देगा,...
मातृभूमि हेतु जान लूटा दी, तेरा वैभव अमर रहे मां, बस। मातृभूमि हेतु जान लूटा दी, तेरा वैभव अमर रहे मां, बस।