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Ashish Anand Arya

Abstract

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Ashish Anand Arya

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चम्बल की छाती

चम्बल की छाती

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चम्बल की जो छाती है

नहीं नित-नवल-नीर से निखरी

संवरी समय-समीरों संग

यह जीवन की सहपाठी है!


यह चम्बल की जो ख्याति है

सैनिक सुत वीरों की थाती है

दस्यु-पुत्रों की भी कथा अनेक

विहंगम जिनकी परिपाटी है!


औद्योगिक जहरों से बची हुई

अपनी प्राचीनता में रची हुई

तटबंधों पर त्वरित मलय से

गाथा जीवन-प्रताप सुनाती है!


चम्बल की ही प्रथा है मुझमें

सदियों सहेजी व्यथा भी मुझमें

संस्कृति के सहज सोपानों की

छटा गहरी मुझमें सुहाती है!



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