STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

4  

Surendra kumar singh

Abstract

चलो

चलो

1 min
183

चलो उस तरफ चलें

उस तरफ

वो जो दिख रहा है

अंधेरे का पहाड़

उसके शिखर पर चढ़ें।

क्यों कामना करें

हमेशा रौशनी की

सहारा लें

प्रार्थना का

ज्ञान का

शास्त्र का।


चलो

उस तरफ चलें

जिधर प्रकृति खुद

बदल रही है

और हमें बदलने का

सन्देश दे रही है

नया प्रेम है

उसका हमसे

जो हम नहीं कर सकते

हमारे लिये खुद कर रही है।


एक पल के

लिए बंद करें आंखें

सोचें हम क्या नहीं कर सकते हैं

और दीदार करें

प्रकृति का

वो सब करते हुये।

नया रूप है

प्रकृति का

अवतरित है हममें

हमारे लिये।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract