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Arvina Ghalot

Romance


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Arvina Ghalot

Romance


छलिया

छलिया

1 min 256 1 min 256

ओ छलिया ओ छलिया

प्रीत डोर तोड़ गई तुम

 मुझको हाय छल गई तुम

दुनियां की भीड़ में खो गई तुम 

तुम मुझे याद बहुत आओगी 


ओ छलिया ओ छलिया 

बन के प्रियतमा लुभाया मुझे

रोज रोज बातों में उलझाया मुझे

बंदा मैं था सीधा सादा 

प्रेम रोग मुझको लगाया ही क्यों 


ओ छलिया ओ छलिया

फूल गुलाब भेंट किया मैंने

निर्दयी तुमने कांटों को मेरे लिए छोड़ दिया

नये सफर पर चल पड़ी तुम

हाय मुड़ कर एक बार ना देखा मुझे


ओ छलिया ओ छलिया 

मेरी जिंदगी में अब उड़ती है धूल 

तेरी बातें सब चुभती है बनकर शूल

तुम चली गई गुबार रह गया

ओ छलिया ओ छलिया।


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