STORYMIRROR

Kahkashan Danish

Tragedy

3  

Kahkashan Danish

Tragedy

चेतावनी

चेतावनी

1 min
288

मेरे प्राणों को लेकर तुम,

कितना आगे बढ़ पाओगे।

मुझसे ही जीवन है सबका,

कब मेरा क़र्ज़ चुकाओगे?

भूल ही बैठे प्रगति पथ पर,

नष्ठ सभी कर डाला तुमने।

मेरी सांसें टूटी जिस दिन,

खुद की भी जान गवाओगे।।"


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy