Kahkashan Danish
Tragedy
मेरे प्राणों को लेकर तुम,
कितना आगे बढ़ पाओगे।
मुझसे ही जीवन है सबका,
कब मेरा क़र्ज़ चुकाओगे?
भूल ही बैठे प्रगति पथ पर,
नष्ठ सभी कर डाला तुमने।
मेरी सांसें टूटी जिस दिन,
खुद की भी जान गवाओगे।।"
मेरे मुरशिद
जीवन और संघर्...
सावधानी
मिट्टी का गीत
कैसी तन्हाई ?
हौसला रखिऐ
माफ़ीनामा
रब ही जाने!
हिज्र में उम्...
अपनी हक की लड़ाई लड़ूँ तो बदतमीज नारी हूँ कहलाई अपनी हक की लड़ाई लड़ूँ तो बदतमीज नारी हूँ कहलाई
ब्याज का अब पहाड़ देख पल-पल जीवन की उम्मीद को मैं खोया था ब्याज का अब पहाड़ देख पल-पल जीवन की उम्मीद को मैं खोया था
बेरंग होता शहर का जीवन सुख शांति ना चैन यहाँ। बेरंग होता शहर का जीवन सुख शांति ना चैन यहाँ।
याद करके तुझे दिन रात अश्क बहाया करता हूं याद करके तुझे दिन रात अश्क बहाया करता हूं
कभी किस्तों में जोड़ जोड़ कर कुछ रिश्तों को खास बनाया है कभी किस्तों में जोड़ जोड़ कर कुछ रिश्तों को खास बनाया है
आहत और गंभीर भी हूँ देख, देश की हालत से मैं थोड़ा सा गमगीन भी हूँ। आहत और गंभीर भी हूँ देख, देश की हालत से मैं थोड़ा सा गमगीन भी हूँ।
यहाँ पर अजनबी से हम मगर पहचान है घर पर यहाँ पर अजनबी से हम मगर पहचान है घर पर
जीने का अहसास है बाकी मेरी कोई कोई साँस है बाकी। जीने का अहसास है बाकी मेरी कोई कोई साँस है बाकी।
किराये का घर है, जिसे दुनिया कहते हैं। एक दिन खाली करना ही पड़ेगा ! किराये का घर है, जिसे दुनिया कहते हैं। एक दिन खाली करना ही पड़ेगा !
स्वच्छ बनेगा अब अपना भारत सुंदर सपना दिखाया था || स्वच्छ बनेगा अब अपना भारत सुंदर सपना दिखाया था ||
यहाँ बात सच की हो रही है जनाब झूटों कोई काम नहीँ। यहाँ बात सच की हो रही है जनाब झूटों कोई काम नहीँ।
सत्य कहने का अगर साहस न हो तो। व्यर्थ कविता काव्य मंचों पर सुनाना। सत्य कहने का अगर साहस न हो तो। व्यर्थ कविता काव्य मंचों पर सुनाना।
यहा बात सच की हो रही है जनाब झूटों कोई काम नहीँ। यहा बात सच की हो रही है जनाब झूटों कोई काम नहीँ।
सिसकियाँ मैं दबाती रही रात भर। ग़म की आहट छुपाती रही रात भर।। सिसकियाँ मैं दबाती रही रात भर। ग़म की आहट छुपाती रही रात भर।।
समझ ना आता अब तक कैसे तुम स्वार्थी लोगों के साथ रहे. समझ ना आता अब तक कैसे तुम स्वार्थी लोगों के साथ रहे.
दूर बच्चों की टोली देख के मन उसका भी मचल गया था, मैं भी पढ़ने जाऊंगा। दूर बच्चों की टोली देख के मन उसका भी मचल गया था, मैं भी पढ़ने जाऊंगा।
चंद खुशियों की खातिर, हमने लोगो को, क्या-क्या करते देखा है। चंद खुशियों की खातिर, हमने लोगो को, क्या-क्या करते देखा है।
यूं ही पिसते जा रहे है हम, कुछ उम्मीद तो जलाए जा रहे है हम। यूं ही पिसते जा रहे है हम, कुछ उम्मीद तो जलाए जा रहे है हम।
नवल सपनों के अंकुरो का भी मुझको अब ना भान कोई।। नवल सपनों के अंकुरो का भी मुझको अब ना भान कोई।।
हर भेद को जान के तेरे चोट गहरी दे जाएगा। हर भेद को जान के तेरे चोट गहरी दे जाएगा।