STORYMIRROR

Sonam Kewat

Classics

3  

Sonam Kewat

Classics

चैन की नींद

चैन की नींद

1 min
368

सोता था चैन की नींद में,

मां जब भी लोरी सुनाती थी।

होते सुबह वह गोद में लेकर,

पुचकार के मुझे उठाती थी।


उसके जिगर का टुकड़ा था मैं,

आंखों का तारा मुझे बुलाती थी।

मेरे गिरने पर वह खुद रोती पर,

मुझे कभी भी नहीं रुलाती थी।


हर सुबह आज भी मैं,

मां की यादें याद करता हूं।

वह दूर है बहुत मुझसे पर,

मैं हर अंगड़ाई में आहें भरता हूं।


बीत जाती रातें बस लोरी में,

भोर होतें ही मुझे जगाती थी।

जाग गई है कलियां सारी और,

कमल के फूल भी खिल गए हैं।


चिड़िया भी चहचहा रही है और,

किरणें चारों दिशाओं में फैल गए हैं।

जाने क्या कह कह कर वह,

हमेशा अपनीं बातों से बहलाती थी।


हाँ वो मेरी माँ थी जो,

मुझे चैन की नींद सुलाती थीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics