Hardik Mahajan Hardik
Classics
जब मधुर संगीत बजता है,
तो पैर जमीन पर
थिरकते हैं,
संगीत की धुन से ही मधुर
गीत बनता है,
जिससे जीवन का संगीत
निकलता हैं..!
इस जाते हुए न...
उस मोड़ पर
जीवन में
न हारे थे, न ...
कुछ जज़्बातों...
हर घर सजाता
दिवाली की रोश...
जगमगाओं रोशनी...
चंद-चंद करके
सरल,सहज, शुद्...
आज़ाद परिंदे थे कभी, अब "शकुन" पिंजरे में बंद हुऐ। आज़ाद परिंदे थे कभी, अब "शकुन" पिंजरे में बंद हुऐ।
अंधेरों में भी मिलता है सुकून रोशनी वालों हम सिर्फ रोशनी में जी सकते हैं क्या। अंधेरों में भी मिलता है सुकून रोशनी वालों हम सिर्फ रोशनी में जी सकते हैं क्या...
वो थाम ले जो हाथ मेरा, तो दरिया भी लगता समंदर है। वो थाम ले जो हाथ मेरा, तो दरिया भी लगता समंदर है।
मान लेते हैं कि अब से, तुम मुझे और मैं तुमको कबूल। मान लेते हैं कि अब से, तुम मुझे और मैं तुमको कबूल।
भाग्य वैभव का गुरुर मत रखना दुनियादारी का अंत राख बनना। भाग्य वैभव का गुरुर मत रखना दुनियादारी का अंत राख बनना।
परिस्थिति से लड़ गुजरने के काबिल बनाता है। परिस्थिति से लड़ गुजरने के काबिल बनाता है।
एक अबोध बालक को एक जिम्मेदार नागरिक बनाया एक अबोध बालक को एक जिम्मेदार नागरिक बनाया
थाम लूँगा तुम्हें अभी एक सूखा किनारा हूँ। थाम लूँगा तुम्हें अभी एक सूखा किनारा हूँ।
हर किसी के जीवन का कहां उपहार है बेटी। हर किसी के जीवन का कहां उपहार है बेटी।
उस पालनहार की जो बिन कुछ किये, गंवा देने के लिए नहीं। उस पालनहार की जो बिन कुछ किये, गंवा देने के लिए नहीं।
समझ रहे हैं और शांति बनाये रखने के सतत प्रयत्न कर रहे हैं। समझ रहे हैं और शांति बनाये रखने के सतत प्रयत्न कर रहे हैं।
काश ! अगर होती नारी, तो ये दुनिया बन जाती कितनी प्यारी। काश ! अगर होती नारी, तो ये दुनिया बन जाती कितनी प्यारी।
क्यों बन जाता हैं चेहरा मेरा मन होता हैं वैसा यही सोचता हूँ अक्सर जब चाँद को देखता क्यों बन जाता हैं चेहरा मेरा मन होता हैं वैसा यही सोचता हूँ अक्सर जब चाँद क...
गुरुजनों के आशीर्वचन से सम्प्राप्ति होंगे प्रसिद्धि सर्वसिद्धि। गुरुजनों के आशीर्वचन से सम्प्राप्ति होंगे प्रसिद्धि सर्वसिद्धि।
तेरी हर बात हम सुनते रहे, जब तुझसे कुछ कहते दस्तुर -ए जिंदगी, तब तक तू गुजर जाती तेरी हर बात हम सुनते रहे, जब तुझसे कुछ कहते दस्तुर -ए जिंदगी, तब तक त...
तुम्हारे अच्छे के लिए सामने में बुरा ही सही पर मैं जरूर बोलूंगी सीधी बात। तुम्हारे अच्छे के लिए सामने में बुरा ही सही पर मैं जरूर बोलूंगी सीधी बात।
वो खुलकर जीना भी क्या जीना था जब बहता मेहनत का पसीना था वो खुलकर जीना भी क्या जीना था जब बहता मेहनत का पसीना था
नारी लेती है ममता का रूप, स्त्री का हर स्वरूप है अपरूप। नारी लेती है ममता का रूप, स्त्री का हर स्वरूप है अपरूप।
कर दो मुझे दृष्टिहीन, बस इतना कर दो। मत दिखाओ कालरुप, मत हो जाओ सृष्टिहीन। कर दो मुझे दृष्टिहीन, बस इतना कर दो। मत दिखाओ कालरुप, मत हो जाओ सृष्टिह...
इतना तो ज्ञात है तुम्हें, कि मुझसे वो वीर नहीं। जो मुझे मार सके,तरकश में वो तीर नहीं। इतना तो ज्ञात है तुम्हें, कि मुझसे वो वीर नहीं। जो मुझे मार सके,तरकश में वो त...