Pranali Zarkar
Tragedy Classics
इस कोहरे अंधेरे ने जब,
पनाह देनी चाही..
खिड़की से तब,
रोशनी की एक लकीर आई...
उसने हमें समेटना चाहा है...
और अंधेरा अभी भी गुमराह है..
गुमराह
जाति धर्म की आड़ में हिंसा अलगाववाद और वैमनस्यता फैलाकर जाति धर्म की आड़ में हिंसा अलगाववाद और वैमनस्यता फैलाकर
छोड़ पढ़ाई घर से निकले सपने कितने टूटे हैं छोड़ पढ़ाई घर से निकले सपने कितने टूटे हैं
उम्मीदों की नई उड़ान भरता रहा। उम्मीदों की नई उड़ान भरता रहा।
दबा हूं जिम्मेदारियों के बोझ तले, उठ रही है रग-रग में पीर।। दबा हूं जिम्मेदारियों के बोझ तले, उठ रही है रग-रग में पीर।।
तेरे बिना ये चांदनी रात मुझे अंधेरी लगती हैं, तेरे बिना ये चांदनी रात मुझे अंधेरी लगती हैं,
आसमान के सितारों के साथ, महफिल जमाकर मैं क्या करुं? आसमान के सितारों के साथ, महफिल जमाकर मैं क्या करुं?
मस्तमौला उसका मिजाज़ है, बेख़ौफ़ उसका अंदाज़ है, मस्तमौला उसका मिजाज़ है, बेख़ौफ़ उसका अंदाज़ है,
तुम्हारे तानों के बोझ तले दबी जा रही हूँ, तुम्हारे तानों के बोझ तले दबी जा रही हूँ,
ऊपरवाला जाने, हमारे भाग्य में क्या कुछ लिखा है उन्होंने... ऊपरवाला जाने, हमारे भाग्य में क्या कुछ लिखा है उन्होंने...
तुम्हारे ख्वाबों में हम रोज डुबते रहे, तुम्हारे ख्वाबों में हम रोज डुबते रहे,
छी: ! तुम मानव मन की गहराई को क्या ही जानते हो ? छी: ! तुम मानव मन की गहराई को क्या ही जानते हो ?
तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखे बिना चैन नहीं आता, तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखे बिना चैन नहीं आता,
लुत्फ उठाओ जिंदगी का, जिम्मेदारियों में क्यों दबे हो, लुत्फ उठाओ जिंदगी का, जिम्मेदारियों में क्यों दबे हो,
तुम्हें जीतना अच्छा लगता कदम कदम पर दे धोखा। तुम्हें जीतना अच्छा लगता कदम कदम पर दे धोखा।
जब आप जश्न मनाते हैं, लोग आपको खोज लेते हैं, जब आप जश्न मनाते हैं, लोग आपको खोज लेते हैं,
अब न तरसाओ मुझे ओ मेरी जानेमन, तुझे मेरी बांहों में सिमटा कर रहूंगा मैं। अब न तरसाओ मुझे ओ मेरी जानेमन, तुझे मेरी बांहों में सिमटा कर रहूंगा मैं।
जो मिटा सकती है फ़ासला मजदूर व मालिक का, जो मिटा सकती है फ़ासला मजदूर व मालिक का,
तेरी यादें लहरें बनकर मेरे हर पल को झकझोरने लगती है। तेरी यादें लहरें बनकर मेरे हर पल को झकझोरने लगती है।
पर कभी कभी सपनों में मुझसे मिलने आया करो। पर कभी कभी सपनों में मुझसे मिलने आया करो।
सूरज ने फिर मुझ से बोला मैंने गर्मी न बढ़ाई गाड़ियों का धुआँ भाई आग जंगल में लगाई इ... सूरज ने फिर मुझ से बोला मैंने गर्मी न बढ़ाई गाड़ियों का धुआँ भाई आग ...