चाँदनी की बात
चाँदनी की बात
चाँद आज फ़लक पर है,
चाँदनी भरी रात है।
सितारे सजाकर आसमान पर ,
लाया ये सौग़ात है।
प्रकृति दूध से नहा उठी,
दिखाई अंधेरे को प्रात है।
चमक रहे है वृक्ष भी,
पुष्प सा दिखता पात है।
आज का चाँद सूरज हुआ,
भाष्कर को लगा घात है।
व्याकुल हुआ पपीहा भी,
नाच नाच कर गात है।
मन के भाव उमड़ पड़े,
हिए उठती जज़्बात है,
ज्वार भाटे सब उठने लगे,
पर्वत को देता मात है।
चली नार पूजन को मंदिर,
बताखे भरी परात है।
पूनम लाया आज का चाँद,
अब वह पुकारती कहाँ तू तात है।

