Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

anuradha chauhan

Abstract


4.5  

anuradha chauhan

Abstract


चाँद तू छुप ना जाना

चाँद तू छुप ना जाना

1 min 257 1 min 257

छनक उठे पायल के घुँघरू

सुन आहट तेरे आने की

हाथों का कँगना भी इनका

ले आशाएं मनभावन सी


सुन चंचल पुरवाई पवन

रुक हौले से उसे आने दे

बैरी चाँद तू छुप ना जाना

चाँदनी को बिखर जाने दे


अँधियारा कहीं राह न रोके

निशा डराए घनघोर घनी

गिन गिन हारी गगन पे तारे 

महक रही हैं नागफनी


पीपल पात झूमते डाली

परछाई तेरी ढूँढ रही

खनक उठी हाथों की चूड़ी

विरह वेदना जाए न सही


रात अँधेरी बीत चली है

दिखती अम्बर पे लाली

स्वप्न टूटकर गिरे धरातल

धूप झाँकती है जाली


बीत रही हैं दिन औ रातें

आशाएं धूमिल होती

मुखड़े पर चिंता की रेखा

पीड़ा के बीजे बोती


चूड़ी बिंदी पायल कंगना

चमक नही खोने पाए

आ जाओ सीमा के प्रहरी

तुम बिन जियरा अब घबराए।


Rate this content
Log in

More hindi poem from anuradha chauhan

Similar hindi poem from Abstract