STORYMIRROR

anuradha chauhan

Others

2  

anuradha chauhan

Others

बेटी की विदाई

बेटी की विदाई

1 min
48

अविरल नयनों से बहे, आँसू बनकर पीर।

होती है बेटी विदा, कैसे धर लें धीर।

कैसे धर लें धीर, चली प्राणों से प्यारी।

छूटा यह घर द्वार, पराई बाबुल क्यारी।

कहती अनु यह देख, प्रथा यह कैसी अविचल।

छूटा बाबुल देश, नयन बहते हैं अविरल।


Rate this content
Log in