STORYMIRROR

Shweta Chaturvedi

Romance

3  

Shweta Chaturvedi

Romance

चाँद से साझेदारी

चाँद से साझेदारी

1 min
463

 

चाँद को देख कर लगा कि 

शायद सागर के पारदर्शी पानी में 

डुबकी लगा कर 

बदन से झरती हुई बूँदे 

मेरे ऊपर छिड़क कर बोल रहा है 

कि लो तुम भी थोड़ा चख लो 

उन हवाओं में घुली साँसों को, 

उस पानी उस छुवन को। 


आज आसमान के इस फैलाव पर 

नाज़ हो रहा है, 

कि कहाँ तक फैली हैं इसकी बाहें, 

तुम्हें थाम कर मुझे भी थाम लिया। 

और चाँद पर सवार होकर बेबाक़ी से 

सीधा माथा चूम लिया। 


याद तो हर पल आते हो 

पर ना जताने का मन करता 

ना बताने का। 

पर हवाओं में घुलने का मन ज़रूर करता है। 


कहीं को जा कर टकरा जाऊँ, 

पर क्या ये हवाएँ दूर सुदूर 

सरहदें पार कर पहुँचती होंगीं। 


फिर लगता है चाँद से ही साझेदारी कर लूँ 

दूर कहीं पी के पास ले चले 

और मैं पी की बाँहों में सिमट जाऊँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance