STORYMIRROR

Manishaben Jadav

Romance

3  

Manishaben Jadav

Romance

चाहत

चाहत

1 min
354


चाहत तुम्हारी ऐसी कब मिल गई 

        पता ही नही चला।

आदत तुम्हारी कब इतनी लग गई

       पता ही नही चला।

तुम बिन जिंदगी उदास लगने लगी

       पता ही नही चला।

कब तुम हमारी जिंदगी बन गए

        पता ही नही चला।

तुम्हारी हंसी सुकून देने लगी

        पता ही नही चला।

तुम संग जिंदगी कितनी चली गई

        पता ही नही चला।

तुमने कब हमारी निंद चुराली

         पता ही नही चला।

जिंदगी हमारी बन गई चाहत तुम्हारी

        पता ही नही चला।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance