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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

ब्याही बेटियां

ब्याही बेटियां

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परदेस में बसी बेटियां

छिपा लेती हैं अपने हर कष्ट को

याद करती हैं अपने पीहर को

अकसर अकेले में

उदास हो कर।


परदेस में बसी बेटियां

लेती हैं गहरी सांस

दबा देती हैं पीड़ा को

तीज त्यौहार पर न पहुंच पाने की

पति को हल्की सी

उलाहना दे कर ।


परदेस में बसी बेटियां

अक्सर घोल कर पी जाती हैं दर्द

चचेरे ममेरे भाई बहनों के

जश्न में शामिल न हो पाने का

देती हैं वास्ता

पति की नौकरी का

बच्चों की पढ़ाई का

हल्का सा मुस्करा कर।


परदेस में बसी बेटियां

बसा लेती हैं एक नया संसार

अपने आस पास

दिल के किसी कोने में

बचपन की यादें

छिपा कर।


परदेस में बसी बेटियां

अपने आंख के कोरों से आंसू पोंछती हैं

और दिल से देती हैं दुआ

रक्षा बंधन और भाई दूज पर

भाइयों के न पहुंच पाने पर।


परदेस में बसी बेटियां

उम्मीद करती हैं अक्सर,

अपनी जिम्मेदारियां पूरी होने की।

कभी कभी दो क्षण

खुद के लिए जी पाने की।

उम्मीद के पंख लगाए

अपने आकाश को छू पाने की।


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