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Ragini Sinha

Romance

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Ragini Sinha

Romance

बूँद

बूँद

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टिप टिप कर टपक रहे हो मुझ में

जैसे बरसों से सुखी इस जमीं को

बारिश नसीब हुई है..


उमड़ घुमड़ कर मंडरा रहे हो मुझ में

जैसे कड़कती बिजलियों को

बारिश नसीब हुई है..



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