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Hardik Mahajan Hardik

Inspirational

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Hardik Mahajan Hardik

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बन्द बोतल में जब पानी

बन्द बोतल में जब पानी

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बन्द बोतल में जल बिकता खुलें बाज़ारों में है।

इसकी कीमत लोगों के समझ नहीं आती है।

बूंद-बूंद जीवन जल की कीमत पहचाननी है। 

बचेगा ना एक बूंद जल प्यास कैसे बुझाओगे

रिश्ते, नाते, दोस्त, बाज़ारो में खरीद बेच रहे है।

 

किल्लत बून्द-बून्द पानी कि समझना होती है। 

जब पानी कि किल्लत कोई समझता नहीं है।

प्यास बुझाने के लिए पँछी भी तरस जाते है।

भटकते है नदी तालाबों में जब प्यास बुझानी,

बून्द-बून्द जल कि कीमत लगाते क्यूँ लोग है।


खरीदी बिक्री करते जहां रोज़ लोग जल है।

पानी की महामारी रुपयों में अब भी जल है।

ना मिलेगा जब पानी कीमत कैसे पहचानोगे,

जहां बेच रहे पानी खुलेआम बाज़ारों में है।


पशु पक्षी इंसान प्यास से जब प्यासा होता है।

बून्द-बून्द पानी के पीछे फिर कैसे तरसते है।

खुलेआम बिकता जल जब बाजार जाओगे,

सुनों पानी कि कीमत लोग अब भी लगाते है। 


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