बना रहे अहसास
बना रहे अहसास
सबसे ज्यादा प्यार इनसे है,
जिनका नाम लेती नहीं मैं!
प्राणों से भी ज्यादा प्यारे हैं,
प्राणनाथ मेरे बहुत न्यारे हैं।
उनकी हर बातों से प्यार झलकता है,
उनकी हर अदा में एक अलग नशा है।
पहली नजर में जिनकी दीवानी हो गई,
प्यार की परिभाषा इनसे ही तो सीखी थी।
ढाई अक्षर का शब्द है यह बड़ा अजीब,
इनसे मिलने पर अजीब सी अहसास जगी
सुबह शाम इनके ही ख्यालों में थी कैद हुई
तब समझ में आया प्यार के करीब हुई।
इतने वर्षों बाद भी वैसा ही कुछ
एहसास जगे,
बसंती बयार चले तो दिल की चुभन खास लगे।
इक पल की भी दूरी मानो वर्षों सी लगने लगे।
जुबां से बोल वो निकले जो रहते हैं कहीं दबे।
ऐसा ही प्यार ताउम्र बना रहे तुम्हारे संग।
जीवन का हर दिन प्रपोज दिन सा लगे।
उस घड़ी में भी झांकती रहूं तुम्हारी आंखों में।
जिस घड़ी यमराज हो सामने मेरे प्राण लेने को खड़े।

