STORYMIRROR

Amit Tiwari

Tragedy

4  

Amit Tiwari

Tragedy

बलात्कार

बलात्कार

1 min
300

मेरे पास वो दांत नहीं

मैं कैसे काटूँ तुम्हें

हाँ तुम्हारे पास दो बेहद पैने दांत हैं

तुम काट सकते हो।


जहां इज़ाजत का हक़ ख़त्म हो जाता है

वहां तक तुम जा सकते हो

ये मेरी हांफती हुई चीख है

और चाहो तो इसे सुन सकते हो।


हो सकता है बुझ चले दीपक में

एक नए प्रकाश का आह्वान हो

सूर्य भी अंधकार में उगता है

और फिर प्रकाश ही दृश्यगत होता है।


सूर्य होता है वहीं जहां होना चाहिए

हमारी दिशा परिवर्तित हो जाती है

ठीक वैसे ही जैसे अभी तुम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy