बिना शर्त प्रेम
बिना शर्त प्रेम
माँ और बच्चे का संबंध माना जाता है,
दुनिया के सारे रिश्तों का पवित्र रिश्ता।
जब एक महिला मां बनती है तो वह संपूर्ण हो जाती है,
जिस दिन उसकी कोख से नन्ही परी का जन्म होता है,
उस दिन नारी अपने आप को गौरवान्वित महसूस करती है।
क्योंकि उसने फिर से बेटी के रूप में जन्म लिया,
वह एक बेटी के रूप में अपना बचपन फिर से जी रही हैं।
माँ और बेटी के बंधन के रूप में जो कभी नहीं टूट सकता,
परमेश्वर की शक्ति और मार्गदर्शन आशीषें बरसाता है।
मां और बेटी का रिश्ता सबसे अनमोल होता है,
दुनिया के तमाम रिश्तों में......
जब नन्ही परी चलने लगती है,
माँ उसकी मासूम हँसी औ' चंचलता में अपना बचपन पाती है।
मां-बेटी का रिश्ता दुनिया का सबसे मजबूत रिश्ता होता है...
मां बिना बताए ही बेटी की हर परेशानी समझ जाती है,
इस प्यारे से रिश्ते में कितने मीठे एहसास छिपे हैं।
मां-बेटी भी हैं औ' अच्छी दोस्त भी,
दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
बेटी की पहली गुरु 'मां' होती है,
बेटी को अच्छे संस्कार मां से ही मिलते हैं।
मां बेटी के जीवन की नींव होती है,
और उसकी आदर्श भी।
वह कदम दर कदम उसका मार्गदर्शन करती है,
और जरूरत पड़ने पर उस पर एक बंधन भी थोपती है।
यही एक ऐसा रिश्ता है जहां तमाम मतभेदों के बावजूद,
दोनों एक दूसरे का ख्याल रखते हैं।
एक बेटी अपने "माँ होने के एहसास" से ज़्यादा अपनी "खुद की पहचान" बनाती है।
सही मायनों में मां-बेटी एक-दूसरे की 'छाया'औ' 'प्रतिबिंब' हैं।
और उनके बीच एक बिना शर्त प्यार है,
जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
केवल वे ही एक दूसरे के लिए,
अपनी भावनाओं को महसूस कर सकते हैं।
आप सबसे 'कीमती उपहार' हैं,
जो मुझे अब तक दिए गए हैं।
मेरे लिए आप हमेशा पूरे ब्रह्मांड का मतलब है,
तुम्हारे बिना जीवन किसी अभिशाप से कम नहीं होगा।

