STORYMIRROR

शाह फैसल सुखनवर

Inspirational

4  

शाह फैसल सुखनवर

Inspirational

बिना मां के

बिना मां के

1 min
442

जहां है अधूरा बिना मां के

न कोई सहारा बिना मां के


भंवर में उलझ जाओगे तन्हा 

न मिलता किनारा बिना मां के


जहां में लगा है पता आकर

हुआ कब सवेरा बिना मां के


हवेली महल भी लगे खाली

है तन्हा बसेरा बिना मां के


सभी कुछ है लेकिन नहीं कुछ भी 

यहां तो हमारा बिना मां के


खुदा ने कभी क्या बता फैसला

किसी को उतारा बिना मां के


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational