STORYMIRROR

manish shukla

Abstract

2  

manish shukla

Abstract

बीती रात कमल दल फूले...

बीती रात कमल दल फूले...

1 min
352

निशा गई,

भोर ऋतु आई,

बीती रात,

कमल दल फुले,

नव उमंग ने ली अंगड़ाई।


हर्षित मन,

उमंग में झूले,

मन मयूर,

उत्साह में डोले

जीवन सुर लहरी संग गाए,


निशा गई,

भोर ऋतु आई

हर दिन की है,

यही कहानी,

अंधकार चीर

,

रोशनी आई,

कल की खुशबू,

आज महकाई,

रात गई,

नई सुबह आई,

कमल दल ने

उम्मीद जगाई।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract