"भगवान महावीर"
"भगवान महावीर"
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को हुआ, जन्म जिन्होंने हिंसा को किया था, ख़त्म
इंद्रियों पर उन्होंने किया था, नियंत्रण
नाम है, उनका सुंदर महावीर भगवन
जैन धर्म के वो तो थे, 24वें तीर्थंकर
उन्होंने मिटाया, मनुष्य जीवन से डर
इंद्रिय काबू कारण कहलाये, जिनेन्द्र
उन्होंने दिये थे, जैनियों को त्रि रत्न
सम्यक ज्ञान, चरित्र, व सम्यक दर्शन
साथ ही उन्होंने दिये, पंच महाव्रत
ये थे सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य
पांचवा था, अपरिग्रह रूपी वचन
अर्थ, जरूरत से ज्यादा न रखे, धन
अस्तेय का अर्थ, चोरी से रहना, बच
जो करता पंच महाव्रत का पालन
वही है, वास्तव में, एक जैन सज्जन
महावीर प्रभु के उपदेश करे, श्रवण
हमारी जिंदगी का मिट जायेगा, भरम
जिसकी सहनशीलता होती है, परम्
लख शूलों में खिलता, बस वो सुमन
हिंसा का वहां हो जाता है, मरण
जहां अहिंसा का हो जाता है, जन्म
वर्तमान में हथियारों के इस दौर में,
परमाणु, आधुनिकरण की होड़ में
महावीर की शिक्षा पर करे, मनन
मिटेगी पशुता, मिटेगा हिंसा दानव
आयेगी शुचिता, आयेगी इंसानियत
शस्त्र सामने वो खड़ा होता निड़र
जो अहिंसा साँसों में बसाता, भीतर
जो हिंसा के सामने, करता न क्रंदन
वो नित हंसता, लगाकर अहिंसा चंदन
जो स्वयं को बना ले, अहिंसा वृक्ष चंदन
वहां पस्त होती, हिंसा नागिन विषधर
दुनिया को बचाना है, हिंसा से गर
अहिंसा का पालन करो, मिलकर
जिंदगी बन जाएगी, हमारी स्वर्ग
प्राणी मात्र प्रति सहानुभूति भाव
हृदय को बनाता मानवता, आगार
आओ धरती को बनाये, हम जन्नत
महावीर की शिक्षा उतारे हृदय तल
मिट जायेगा भीतर का सकल मल
उनकी शिक्षा तो है, पवित्र गंग जल
जय जिनेन्द्र, जय महावीर भगवन
आपकी भक्ति से मिटे, दुःख तपन।
