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KANTA jaipal

Drama Romance Others

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KANTA jaipal

Drama Romance Others

बेटी और उसका आंगन

बेटी और उसका आंगन

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*"बेटी और उसका आंगन"*

बेटी बोझ नहीं थी कभी,  
वो तो घर की रौनक थी,  
हंसी की आवाज़ थी,  
और माँ की गोद की आदत थी।

एक दिन हाथ पीला हुआ,  
डोली सजी, आँखें भर आईं,  
कहा था "बेटा पराया धन है",  
पर दिल ने माना ही नहीं।

जमाई आया घर में,  
सिर झुका के आशीर्वाद लिया,  
बोला "आपकी बेटी मेरी इज़्ज़त है,  
इसे आँचल में रखूँगा।"

आज बेटी ससुराल में रानी है,  
जमाई उसका मान रखता है,  
छोटी-छोटी खुशी में पूछता है -  
"आपको फोन किया था माँ ने?"

बेटी जब घर आती है,  
दहलीज पर माँ खड़ी मिलती है,  
जमाई पीछे से कहता है -  
"माँ, आपकी बेटी थक गई होगी, चाय बना दूँ?"

रिश्ता खून का नहीं,  
पर खून से बढ़कर है ये,  
बेटी ने दो घर रोशन किए,  
और जमाई ने तीसरा दिल जीत लिया।

*-- KANTA Jaipal*

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