बेजुबान जीव
बेजुबान जीव
जानवर भी धरती पर ईश्वर की अनुपम कृति हैं,
प्रकृति की शोभा हैं ये जानवर राष्ट्र की धरोहर हैं
इन जीवों का संरक्षण, हम मनुष्यों का कर्तव्य है,
इंसानों के समान इनको भी अपना जीवन प्रिय है,
मूक प्राणियों को आखिर लोग पीड़ा देते हैं कैसे,
जानवर भी जीवित जीव हैं, हम मनुष्यों के जैसे,
इन जीवों में मनुष्यों से ज़्यादा होती है वफादारी,
ये जीव भी है करुणा और सम्मान के अधिकारी,
ये मूक प्राणी वफादारी में बहुत ही पक्के होते हैं,
प्यार के बदले जीवन भर अपनी वफ़ा निभाते हैं,
बोल नहीं सकते हैं पर प्यार की भाषा समझते हैं,
वफादारी के लिए ये अपनी जान तक दे सकते हैं,
इनकी आंखें भी रोती है, दर्द इन्हें भी तो होता है,
पर इनके आंसुओं को कोई समझ नहीं पाता है,
दुखी हो जाते हैं ये जब कोई इनको दुत्कारता है,
उनके गुमसुम आंखों को कोई नहीं पहचानता है,
इन्हें तो इंसानों से बस थोड़ा सा प्यार ही चाहिए,
आंखों से बोलते ये भी बस समझने वाला चाहिए,
इनको भी पीड़ा मुक्त जीवन जीने का है अधिकार,
ये तो मांगते हैं बस थोड़ी सी सहानुभूति और प्यार,
थोड़ा प्यार देकर देखो जीवन भर साथ निभाएंगे,
इनसे दोस्ती करके देखो कैसे अपने से हो जाएंगे,
कृतज्ञता महसूस करने में मनुष्यों से सक्षम होते हैं
ये मूक प्राणी प्यार के बदले दुगना प्यार लौटाते हैं।
