Neha Prasad
Fantasy Inspirational
बदलती कहानियां,
बदलते रिश्ते,
बदलती सोच,
बदलती भावनाएं,
बदलते रूप,
बदलती दृष्टिकोण
यही सन्देश देते है कि
'परिवर्तन' ही न केवल
प्रकृति का नियम है बल्कि
नई शुरुआत का संकेतक भी है।
मेरी होली का ...
चप्पल
एक याद पुरानी
एक बात
प्यार की छाँव...
बदलाव
आओ मरहम बन जा...
रास्ता
अब तो साजन तु...
बच्चों की आंखों में स्वप्न बसे है कितने रंग भर जाएं बच्चों की आंखों में स्वप्न बसे है कितने रंग भर जाएं
बिना स्पर्श के चुंबन करे तुम्हारे होठ पवित्र ज़्मजम की धार। बिना स्पर्श के चुंबन करे तुम्हारे होठ पवित्र ज़्मजम की धार।
तुम संग लौट जाने को मन करता है... तुम संग लौट जाने को मन करता है...
अक्सर देर में खुद को समझते देखा। अक्सर देर में खुद को समझते देखा।
हर बात काट कर भी इस दिल में जगह बना गए। हर बात काट कर भी इस दिल में जगह बना गए।
दिखावे पर टिकता है प्यार सच्चा प्यार ठुकरा दिया तुमने। दिखावे पर टिकता है प्यार सच्चा प्यार ठुकरा दिया तुमने।
देख आज फिर एक बार यादों के पन्नों में संजोकर रखती हूँ मैं तुझे. देख आज फिर एक बार यादों के पन्नों में संजोकर रखती हूँ मैं तुझे.
दोनों मिले कवि सम्मेलन में कमाल की काव्य प्रस्तुति दोनों की। दोनों मिले कवि सम्मेलन में कमाल की काव्य प्रस्तुति दोनों की।
हम तो शाम सवेरे वही उस तट पर राह तकते रहे हम तो शाम सवेरे वही उस तट पर राह तकते रहे
ऊँचाई भावना सच्चाई चलना सफाई रखना घर, ऊँचाई भावना सच्चाई चलना सफाई रखना घर,
सब छीन लिया कंप्यूटर मोबाइल ने अब कलमों को स्याही नहीं मिलती सब छीन लिया कंप्यूटर मोबाइल ने अब कलमों को स्याही नहीं मिलती
उसके शब्द कभी न पुराने पड़ते हैं और न ही मैले -कुचैले उसके शब्द कभी न पुराने पड़ते हैं और न ही मैले -कुचैले
याद आते हैं माँ के हाथों के बनाए पकवान, याद आते हैं माँ के हाथों के बनाए पकवान,
दर्द की घाटियों में डूबते उतरते जब भी कोई नाम पुकारा है। दर्द की घाटियों में डूबते उतरते जब भी कोई नाम पुकारा है।
शुभकामनाए बिखेरे, अँधेरी रात के तोड़े तूने सपने तृष्णा के। शुभकामनाए बिखेरे, अँधेरी रात के तोड़े तूने सपने तृष्णा के।
कोयल अब कूक रही सखि बसंत आया कुदरत भी मूक नहीं कोयल अब कूक रही सखि बसंत आया कुदरत भी मूक नहीं
अंधेरे क्या प्रभात को रोक पाते हैं खुशियों के मंजर लौटकर जल्द जाते हैं। अंधेरे क्या प्रभात को रोक पाते हैं खुशियों के मंजर लौटकर जल्द जाते हैं।
वो मखमली सी शाम की लाली थी अम्बर में, तेरे रुखसार का, पानी मैं बताता हूँ। वो मखमली सी शाम की लाली थी अम्बर में, तेरे रुखसार का, पानी मैं बताता हूँ।
एक छाते में, मैं ही अकेला चल रहा था। एक छाते में, मैं ही अकेला चल रहा था।
बस इतना बता दो- कि किसे किसे नहीं सताते हो? कहां -कहां, कब- कब, किस समय नहीं जाते हो? बस इतना बता दो- कि किसे किसे नहीं सताते हो? कहां -कहां, कब- कब, किस समय नहीं ...