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V. Aaradhyaa

Romance

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V. Aaradhyaa

Romance

बड़ा धीमा वो इनकार था

बड़ा धीमा वो इनकार था

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छुपा था वो दिल में पर धीमा सा इनकार था;

यूँ छुप छुपकर मुझे करना उसका दीदार था !


ताउम्र रहे साथ मगर दिल न मिला दिल से ;

अब कैसे कहूँ मैं कि वो मेरा पहला प्यार था!


उलझा रहा सारा जीवन रिश्तों में अब तक ;

चोरी चोरी दिल का वो दिल से सरोकार था !


एहसास हुआ बरसों के बाद हमें अपनेआप ;

हम दोनो के दिल का वो तकरार ग़लत था


हम से तो गुनाहे-उल्फ़त भी हो न सका कभी ;

दिल ने चुना जिसे वो इश्क का गुनहगार था !


मजबूर किया होगा उसके दिल को दुनिया ने ;

मैं कैसे कहूँ उसको जो दिल से किया प्यार था!


मतले से मक़ते तक हमने की दिल की बात ;

दिल ये कैसे गवाही दे कि वो मेरा इज़हार था।


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