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Vivek Gulati

Children

3  

Vivek Gulati

Children

बचपन

बचपन

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बोल ना पाऊँ पूरे बोल

तुतलाऊँ मुंह करके गोल

बातें अपनी खूब समझाऊँ

टूटी फूटी बोल सबको हंसाऊँ

अंदाज सबके पूरे अपनाऊँ

बातें दोहराऊँ और तोता कहलाऊँ

जी भर के कर लो शैतानियाँ

आगे चल के हैं बस परेशानियाँ

भोली सूरत की बड़ी हैं खूबियाँ

झट से माफ़ होती सारी गुस्ताखियाँ

बचपन जीवन का है सबसे बेहतरीन रूप

आगे तो बस खुला है आसमां और सिर पर धूप


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