STORYMIRROR

ayush jain

Abstract

4  

ayush jain

Abstract

बच्चे बन जाओ

बच्चे बन जाओ

1 min
251

वो पुराने किस्से फिर से दोहराओ चलो 'बच्चे बन जाओ'..


वो किराये का  कमरा पुकारता है मुझे आज भी,

परियों के किस्से अब कोई तो सुनाओ, चलो 'बच्चे बन जाओ'


और वही पुराना  मकान और वो बारिश का पानी,

कोई काग़ज की कश्ती तो बनाओ, चलो 'बच्चे बन जाओ'..


चलो फिर से जीते है वो खोया हुआ बचपन, 

यूँ खाली बेठे आँसू ना बहाओ, चलो 'बच्चे बन जाओ'..


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract