बैर
बैर
ना धुआँ है, ना शोर है
जितनी जरुरत उतना ही सफर है।
सड़क हो गयी है खामोश
बेवजह के मेले अब गुम है।।
जरुरत तो साफ़ हवा की है
के तेरी नस्ल सांस ले पाए।
लेकिन तू चलाता है Harley
पीती वह पेट्रोल खूब है।।
जिस जल के लिए लोग चलते है मीलों
शहरों में वह होता बर्बाद खूब है।
लेकिन हमे उससे क्या लेना क्योंकि
बीफ और दारु का नशा जरूरी है।।
असली पेड़ के जगह
प्लास्टिक के मनी प्लांट लगाते है हम।
मनी आया
और मेडिकल के बिल भी साथ ले आया।।
बंद आंखों की पट्टी खोलो
के देर ना हो जाये ।
सृष्टि है पहले से परेशान
आओ मिल के इसका कर्ज चुकाए।।
व्यर्थ ना जाए जल
व्यर्थ ना जाए अन्न
व्यर्थ ना काटे पेड़
बिन इनके हम कुछ भी नहीं
ना कर प्रकृति से बैर ।
ना कर प्रकृति से बैर।।
