Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

EK SHAYAR KA KHAWAAB

Abstract

3  

EK SHAYAR KA KHAWAAB

Abstract

बात नही करता

बात नही करता

1 min
219


आजकल मै किसी से बात नहीं करता।

क्योकि मेरे सिवा कोई मुझसे बात नहीं करता।


मेरी बातों मे अजीब सी ख़ामोशी छाई है। 

जिंदगी की उम्मीद ने मौत की तस्वीर दिखाई है।


जिंदा हूँ मगर मुर्दो के बीच रहता हूँ।

बस राख का ढेर नहीं हुआ,आग की तपिश सा सिकता हूँ।


बस मंजिल ही नहीं मिलती।

बाकि किनारो को मझधार समझ लेता हूँ।


रहबर तो मिल गया है।

पर रास्तो सँग चलने को मंजूरी नहीं मिलती।


खूब साथ दिया उसने भी मेरा।

न मुझे गिरने दिया ना मुझे जमीन से उठने दिया।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract