"बापू"
"बापू"
बापू तेरी याद सताती है,
आँखों में नीर भर लाती है,
जिक्र होता है जब खुदा का,
तेरी सूरत आँखों में उभर जाती है,
तेरे जैसा युग पुरूष,
हुआ न, कभी होगा,
जिसने सुदर्शन चरख़े में लगा,
गोरों की नींव को हिला डाला,
पहन के धोती लकुटिया,
जो असंभव था वो कर डाला,
इस चरखे के बूते,
इतिहास बदल डाला,
तुम्हारीं मानते तो ऐ बापू,
देश का विभाजन न हुआ होता,
दुश्मन बन भाई - भाई,
यूँ सरहद पर न डटा होता,
बापू के तीन बन्दर,
आज भी सबक़ सिखातें हैं,
बुरा मत देखों, बुरा मत सुनों,
बुरा मत कहो का पाठ पढ़ाते हैं,
रघुपति राघव राजा राम की धुन ने,
आप को जन - मानस का प्रिय बना दिया,
वैष्णव जन तो तैने कहिये जी,
पीर - परायी जानें रे ने,
हैवानों को भी,
इंसानियत का सबक सिखा दिया,
आज भी इंसान तेरे,
सत्याग्रह को भुला नहीं पाता है,
जब भी आफत आती,
उसे ही तो अपनाता हैं,
तुम्हारें बनायें रस्तें को,
ऐ बापू, भारत ने अपनाया हैं,
अहिंसा - परमोधर्म का पाठ,
दुनिया को बतलाया है,
बारूद के ढ़ेर पर,
खड़ी है दुनिया,
हम शांति का पाठ उनकों पढ़ा रहें,
आप के पद्चिन्हों पर चलके बापू,
दुनिया को तबाह होने से बचा रहें,
इक बार फिर आ जाओ बापू,
"शकुन" तुम्हें बुलाती है,
देशद्रोही जो पनप रहें,
उनसे निज़ात चाहती हैं।
