बालपन (बाल कविता)
बालपन (बाल कविता)
नन्हे क़दमों की धीमी चाल,
हँसी-ठिठोली, मीठी ताल,
रंग बिरंगी तितलियों संग
जैसे हो कल की बात।
कागज़ की नाव, बारिश का पानी
रेत के घरौंदे, नानी की कहानी,
माँ की गोद, आंखों में सपने
खेल खिलौने लगते अपने।
चंदा मामा संग बतियाना,
परियों संग गगन उड़ जाना,
तारों से बातें, बादल को छूना,
इंद्रधनुष सा सपना बुनना।
ओ बालपन! ओ सतरंगी पल,
लौट आ, तू कर हलचल,
ये निश्चल हसीं यूं ही मुस्काए
बालपन की याद दिलाएं।
