STORYMIRROR

Neelam Chawla

Inspirational

4  

Neelam Chawla

Inspirational

बाल मनोविज्ञान

बाल मनोविज्ञान

1 min
344

वो छोटी थी

एक मासूम सी 

जब माँ ईंटें उठाती थी

पेड़ उसकी रक्षा में

तना रहता 

सूरज की किरणों 

को पत्तीयां 

निगलती थी

नन्ही मुस्कराती थी


 आज देश की रक्षक है वो


पिता ने बहुत मारा 

उस रात माॅं को

दरवाजे के पीछे खड़ी

सहम गई।


आज तलवार चलाती है वो



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational