बादल
बादल
नीचे धरती
ऊपर आकाश
दोनों के बीच !
एक बादलों का संसार।
भिन्न-भिन्न आकारों में
ये दौड़ लगाते हैं,
थोड़ी-थोड़ी देर में
ये रंग बदल आते हैं।
कभी हाथी,कभी घोड़ा,
कभी मानव आकार
में भी आ जाते हैं।
क्या रचना है प्रकृति की
जिस रूप में चाहो
उसी रूप में
प्रकट हो जाते हैं।
दूध का उबाल ,रूई सा झाग
इनका ये स्वच्छ रूप
दिल को ये समझा गया
कि!
जितना ऊपर उठ जाओगे
उतने पवित्र हो जाओगे।
संसार का प्रदूषण
न तुम्हे दूषित कर पायेगा
स्वयं को हमेशा
धवल ही पाओगे।
इन बादलों के संग
अटखेलियों का मजा,
जीवन की सार्थकता
समझा जायेगा।
बादल भी काला होने पर
फट जाता है
पाप का घड़ा भरने पर
मानव भी नष्ट हो जाता है।
ये स्वच्छ बादल देते हैं संदेश
जीवन होगा जितना धवल,
जीवन होगा उतना सफल।
