STORYMIRROR

Hitesh pal

Abstract

3  

Hitesh pal

Abstract

औरत की आवाज

औरत की आवाज

1 min
212

चुप रहने से बात बन जाती है

जो बात ज़ुबान पर नहीं आती,

वो आँखें कह जाती हैं

बोलना तो वह चाहती हैं

मगर हालात देख चुप रह जाती हैं

कभी हँस कर तो कभी रो कर 

अपने मन मे बात छुपाती है,

बोलने से बात बिगड़ जाती है

चुप रहकर सारी बात कह जाती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract