Hitesh pal
Abstract
अजनबी हूँ इस शहर में
कोई तो अपना लो
प्यार ना दो भले
एक पल इस दर्द में साथ निभा लो
उपकार होगा उनका जो
हमें अपने गले लगायेंगे
हम भी भगवान समझ
उन्हें ह्रदय में बसायेंगे
कोई तो अपना लो।
तेरी याद पिया
अधूरी मोहब्बत
मेरी कामयाबी
सुनहरी रात
मेरा जन्म
बूँद
हालात
हमारा प्यार
ये दूरियाँ
अजनबी हूँ
खूबसूरत शाम और गुनगुनी धूप का एहसास है तू मेरे जीवन में सबसे ख़ास है तू। खूबसूरत शाम और गुनगुनी धूप का एहसास है तू मेरे जीवन में सबसे ख़ास है तू।
दो रात को भी उतना ही प्यार, बनो ख़ुद ही कश्ती ख़ुद पतवार। दो रात को भी उतना ही प्यार, बनो ख़ुद ही कश्ती ख़ुद पतवार।
मैं फिर रक्त शिलाओं को स्पर्श देती हूँ आश्वासन का... मैं फिर रक्त शिलाओं को स्पर्श देती हूँ आश्वासन का...
यकीन करो, याद तीखी मिर्ची सी होती है। यकीन करो, याद तीखी मिर्ची सी होती है।
ये समझ आया है माँ, मैंने हमेशा केवल तुमसे पाया है। ये समझ आया है माँ, मैंने हमेशा केवल तुमसे पाया है।
मात ही कष्टों के अवमोचन। मात ही सत् देवी मम् लोचन। मात ही कष्टों के अवमोचन। मात ही सत् देवी मम् लोचन।
ध्वंस तानाशाह तेरा और वध खुद का करेगा। ध्वंस तानाशाह तेरा और वध खुद का करेगा।
इन सब सवालों के जवाब लिख दो एक ख़त मेरे नाम लिख दो। इन सब सवालों के जवाब लिख दो एक ख़त मेरे नाम लिख दो।
तुम्हारी तय की गई समय सीमा के भीतर तुम्हें ऐसे कुछ काम थे मुझसे। तुम्हारी तय की गई समय सीमा के भीतर तुम्हें ऐसे कुछ काम थे मुझसे।
मान क्यों भरी है कुछ खोने के एहसास से ? मान क्यों भरी है कुछ खोने के एहसास से ?
इन्तज़ार दरिया के इश्क समंदर में है मिल जाना। इन्तज़ार दरिया के इश्क समंदर में है मिल जाना।
अदावत का मेहमान अदाओं पर मर मिटता अदावत में मिट जाता इंसा। अदावत का मेहमान अदाओं पर मर मिटता अदावत में मिट जाता इंसा।
तेरे सम्मुख झुक न सकूं जो, इतना मुझमें दर्प नहीं है। तेरे सम्मुख झुक न सकूं जो, इतना मुझमें दर्प नहीं है।
कोरोना से मुक्ति ही दुनिया का बचाव हो गया जय हिन्द जय भारत। कोरोना से मुक्ति ही दुनिया का बचाव हो गया जय हिन्द जय भारत।
मैं हूं हिन्दुस्तानी और मेरा है यह हिन्दुस्तान। मैं हूं हिन्दुस्तानी और मेरा है यह हिन्दुस्तान।
लख चौरासी भोग, मानुष चोला छोड़, "शकुन" मुक्ति का मार्ग बनाना है ! लख चौरासी भोग, मानुष चोला छोड़, "शकुन" मुक्ति का मार्ग बनाना है !
लगा देश के लिए गए हैं प्राणों की बाजी जो। लगा देश के लिए गए हैं प्राणों की बाजी जो।
विश्वास का दीप जला रहा कच्चा सा ये दिल लम्हें नये चुन रहा। विश्वास का दीप जला रहा कच्चा सा ये दिल लम्हें नये चुन रहा।
दीपक जले दीया तले अंधेरा छुपके पले दीपक जले दीया तले अंधेरा छुपके पले