STORYMIRROR

SHALINI SINGH

Abstract

4  

SHALINI SINGH

Abstract

Astitva: एक ख़्वाब

Astitva: एक ख़्वाब

1 min
274

दिल जो चाहे बस तु वही है,

ईबादत है ज़िंदगी की,

ख़्वाहिशें भी तेरे होने की आस लगाए खड़ी है।


तु है वो जो दिल चाहता है कहना,

बेजुबां बैठूँ तो है खुली आँखों का सपना।

तू है जो कहानियाँ बयां भी ना कर पाएं,

तू है जो दास्तानों में चुप सहमि सी मुस्कुराए।

 

उजले दिन का सूरज डूबता तेरे आँचल में,

नदियों से हवा बहे जैसे साँसों में।

एक ख़्वाब जो हक़ीकत का रुख़ ही बदल दे,


ख़ुद को तराश आईने में,

मुस्कुरा और अपने सफ़र पर चल दे ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract