अस्तित्व के लिए आग्रह
अस्तित्व के लिए आग्रह
हे! दंभी मनुज ! अब बस भी करो ,
लोगों की जिंदगी से खेलना ?
क्यों तुम किसी की जिंदगी कि अहमियत नहीं समझते ?
क्या उनकी जिंदगी का कोई मोल नहीं ?
क्यों तुम सबको अपनी भोग- विलास, और आमोद-प्रमोद का प्रसाधन समझते हो?
क्या उनको जीने का हक नहीं ?
निश्चितरूपेण है उनको भी जीने का हक ।
तो फिर क्यों तुम उनका हक मार रहे हो ?
ये सच है कि ईश्वर द्वारा विवेकशीलता और तर्क- शक्ति तुम्हें वरदान के रूप में मिला है।
लेकिन इसका तुम सही और सकारात्मक दिशा में अनुप्रयोग करो ,
तुम भला किसी का कर नहीं सकते !
तो तुम्हारी भलमनसाहत इसी में है कि तुम व्यर्थ ही अहित किसी का मत करो ।
अपनी बौद्धिक संपदा का उपयोग लोगों की जिंदगी संवारने में करो ।
यह इस लोक में स्वर्ग की सुख की अनुभूति प्रदान करता है।
किसी की जिंदगी यूं ही बर्बाद मत करो ,
हो सके तो या बन सके तो उनकी जिंदगी आबाद करने में गुजार दो ।
यही हमारी,आपकी और पुरे अस्तित्व की बेहतरी के लिए मेरा अंतिम आग्रह है।।
