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Brijlala Rohanअन्वेषी

Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Inspirational

अस्तित्व के लिए आग्रह

अस्तित्व के लिए आग्रह

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हे! दंभी मनुज ! अब बस भी करो ,

लोगों की जिंदगी से खेलना ?

क्यों तुम किसी की जिंदगी कि अहमियत नहीं समझते ?

क्या उनकी जिंदगी का कोई मोल नहीं ?

क्यों तुम सबको अपनी भोग- विलास, और आमोद-प्रमोद का प्रसाधन समझते हो?

क्या उनको जीने का हक नहीं ?

निश्चितरूपेण है उनको भी जीने का हक ।

तो फिर क्यों तुम उनका हक मार रहे हो ?

ये सच है कि ईश्वर द्वारा विवेकशीलता और तर्क- शक्ति तुम्हें वरदान के रूप में मिला है।

 लेकिन इसका तुम सही और सकारात्मक दिशा में अनुप्रयोग करो , 

तुम भला किसी का कर नहीं सकते !

तो तुम्हारी भलमनसाहत इसी में है कि तुम व्यर्थ ही अहित किसी का मत करो ।

अपनी बौद्धिक संपदा का उपयोग लोगों की जिंदगी संवारने में करो ।

यह इस लोक में स्वर्ग की सुख की अनुभूति प्रदान करता है।

किसी की जिंदगी यूं ही बर्बाद मत करो ,

हो सके तो या बन सके तो उनकी जिंदगी आबाद करने में गुजार दो ।

यही हमारी,आपकी और पुरे अस्तित्व की बेहतरी के लिए मेरा अंतिम आग्रह है।।



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