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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

असफलता

असफलता

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कोशिश कर भी गर, असफलता ही हाथ लगी ।

फिर भी निराश हो क्यों तके, हताशा की गली??


चल उठ!! बस पूरे दमखम से, पुरजोर एक कोशिश और ।

असफलता को जीवन में मिले न, कोई कहीं ठौर ।


पस्त हौसलों के पास ही, असफलता आ पाई है ।

हौसलों ने उड़ान भर तो, सरगम बुलंदी की गायी है ।


सुख-दुख, हानि-लाभ तो जीवन में, चलते ही रहते हैं ।

असफलता ही तो सफलता के सोपान नव गढ़ते हैं ।


हार मान बैठता ब्रूनो, तो इतिहास रचता फिर कैसे ??

असफलता न मिली होती तो, सफलता का स्वाद चखता कैसे ?


बनाए रख अपना हौसला कदमों को अब ताव दे ।

परचम फहरा सफलता का, अब तू कहीं असफलता को न भाव दे।


कर प्रभु सुमिरन अपने लक्ष्य पर कोशिश अनुसंधान कर।   

ईश्वर की संतान तू शक्तिशाली उठ, उस का तो मानकर।



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