असफलता
असफलता
कोशिश कर भी गर, असफलता ही हाथ लगी ।
फिर भी निराश हो क्यों तके, हताशा की गली??
चल उठ!! बस पूरे दमखम से, पुरजोर एक कोशिश और ।
असफलता को जीवन में मिले न, कोई कहीं ठौर ।
पस्त हौसलों के पास ही, असफलता आ पाई है ।
हौसलों ने उड़ान भर तो, सरगम बुलंदी की गायी है ।
सुख-दुख, हानि-लाभ तो जीवन में, चलते ही रहते हैं ।
असफलता ही तो सफलता के सोपान नव गढ़ते हैं ।
हार मान बैठता ब्रूनो, तो इतिहास रचता फिर कैसे ??
असफलता न मिली होती तो, सफलता का स्वाद चखता कैसे ?
बनाए रख अपना हौसला कदमों को अब ताव दे ।
परचम फहरा सफलता का, अब तू कहीं असफलता को न भाव दे।
कर प्रभु सुमिरन अपने लक्ष्य पर कोशिश अनुसंधान कर।
ईश्वर की संतान तू शक्तिशाली उठ, उस का तो मानकर।
