Sanjay kumar manik
Drama
ये सलाम नमस्ते सब हैं सस्ते,
ये रिश्ते नाते सब हैं बेकार की बातें,
ये जाना अनजाना सब है बहाना,
जिस दिल ने दिल को पहचाना
वो है असली ख़ज़ाना।
परवाह नहीं
असली ख़ज़ाना
ज़िन्दगी की द...
क्यों है वो इ...
भगवान् था, शैतान था, हैवान था, ज़िंदा होकर भी...वो बेजान था। भगवान् था, शैतान था, हैवान था, ज़िंदा होकर भी...वो बेजान था।
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो। कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो।
माँ की कितनी बात सुनाऊँ, ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती पे माँ कहलाती है। माँ की कितनी बात सुनाऊँ, ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती प...
पुरुष अक्सर मुझसे पूछते हैं, 'तुम्हारी महिला पात्र इतनी पागल क्यों हैं?' पुरुष अक्सर मुझसे पूछते हैं, 'तुम्हारी महिला पात्र इतनी पागल क्यों हैं?'
जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...! जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...!
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
महाकाली की क्षुधा अब भी पापियों के रक्त हेतु अशांत है। महाकाली की क्षुधा अब भी पापियों के रक्त हेतु अशांत है।
हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ। हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ।
इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है
सुबह की खिली हुई धूप का करो,स्वागत इस धूप में मिली हुई है,खुदा की मोहब्बत। सुबह की खिली हुई धूप का करो,स्वागत इस धूप में मिली हुई है,खुदा की मोहब्बत।
ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं देता। ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं द...
यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही, यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही,
मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है, मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है,
चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है। चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है।
क्यूँकि वो नाजायज़ था क्यूँकि वो नाजायज़ था
मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी वीराना गलियों में..... मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी...
आपके दोस्त आपसे मिलने के पहले मिनट में आपको बेहतर तरीके से जान पाएंगे, आपके दोस्त आपसे मिलने के पहले मिनट में आपको बेहतर तरीके से जान पाएंगे,
थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...! थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...!
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...