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Shashank Pandey

Drama

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Shashank Pandey

Drama

अपनी पीड़ा

अपनी पीड़ा

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माप सके तो मापे कोई,

मैं घावों का एक समंदर ।

हमने अपनी पीड़ा हर पल,

राखी अपने दिल के अंदर ।


सुनी सभी की उल्टी सीधी,

मौन रहे हम कुछ ना बोले ।

यदि जवाब भी दिए कभी तो,

उत्तर पहले हमने तोले ।


आघातों को सह कर हमने,

बस सबका सम्मान किया है ।

धन्य धरा की खातिर हमने,

यह तन जीवन दान दिया है ।


हम सुधरे तो जग सुधरे गा,

मन ख्वाबों का एक बवंडर ।

हमने अपनी पीड़ा हर पल,

राखी अपने दिल के अंदर ।


जिस पथ से हम जब भी गुजरे,

सारे कांटे बीन लिए है ।

हमने अपने अंतरमन से,

बागी स्वर सब छीन लिए है ।


दुनिया वालो ये मत समझो,

आघातों से डर जाऊँगा ।

मैं संकल्पित यायावर हूँ,

चलते-चलते मर जाऊँगा ।


खाली हाथ यहाँ से जाते,

देखे है जी कई सिकंदर ।

हमने अपनी पीड़ा हर पल,

राखी अपने दिल के अंदर ।


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