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V. Aaradhyaa

Romance Tragedy

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V. Aaradhyaa

Romance Tragedy

अपने हक में ऊँची आवाज़ न करूँ?

अपने हक में ऊँची आवाज़ न करूँ?

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आपकी मर्ज़ी चाहे ढा लीजिये जितने सितम ,

हम अपने हक में ऊँची आवाज़ नहीं कर सकते!


यूं किसी और को हमराज़ नहीं कर सकते ,

एक  दिल है  उसे नाराज़  नहीं कर सकते !


नाम के हर्फ़-ए-रवी तक में हूँ शामिल मैं तो ,

आप मुझ को नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते!


गाहे गाहे  तिरी  आँखें  वो बयांँ  करती  हैं ,

जो बयांँ महज़ ये अल्फाज़ नहीं कर सकते !


शाख़ से  टूटे हुए फूल  भी काम आते हैं ,

तेरे  ठुकराए हैं  तो नाज़ नहीं  कर सकते !


दर्द की टीस से निकले है हर इक धुन यारा ,

हम जो कर सकते हैं वो साज़ नहीं कर सकते !



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