अंतःकरण
अंतःकरण
मैं स्नेह का सागर बहाता रहता हूंँ,
मैं दुनिया से कभी नहीं डरता हूँ,
मेरे अंतःकरण की आवाज सुनकर,
मैं निर्मलता से जीवन बिताता हूँ।
मैं प्रेम की ज्योत जलाता रहता हूँ,
मैं राग-द्वेष को हमेशा मिटाता हू़ँ,
मेरे अंतःकरण की आवाज सुनकर,
मैं नफ़रत की ज्वाला शांत करता हूँ।
मैं जुल्म-सितम के सामने लड़ता हूँ,
मैं झूठ के आगे कभी नहीं झुकता हूँ,
मेरे अंतःकरण की आवाज सुनकर,
मैं सच्चाई के साथ खड़ा रहता हूँ।
मैं अधर्म का अंधेरा दूर करता हूँ,
मैं धर्म का जय जयकार करता हूँ,
मेरे अंतःकरण की आवाज़ सुनकर,
मैं "मुरली"धर के शरण में रहता हूँ।
